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mahabharat 3.51.41: भरतकुलतिलक! इस प्रकार उन वीर योद्धाओं ने बहुत सी बातें कही थीं। वे सभी तेजस्वी और पराक्रमी हैं। उनके शुभ चिह्न अमिट हैं॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 3.51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.51.41 
एवं बहुविधा वाचस्त ऊचुर्भरतर्षभ।
सर्वे तेजस्विन: शूरा: सर्वे चाहतलक्षणा:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
भरतकुलतिलक! इस प्रकार उन वीर योद्धाओं ने बहुत सी बातें कही थीं। वे सभी तेजस्वी और पराक्रमी हैं। उनके शुभ चिह्न अमिट हैं॥ 41॥
 
Bharatkultilak! In this way those brave warriors had said many things. All of them are radiant and valiant. Their auspicious signs are indelible.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)