Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.51.27: 'मैं तुम्हारा वह चिरस्थायी ऐश्वर्य, जो चारों ओर फैला हुआ है, लौटा लाऊँगा, चाहे इसके लिए मुझे उन लोगों के प्राण भी लेने पड़ें जिन्होंने छलपूर्वक उसे छीन लिया है।॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 3.51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सा ते समृद्धिर्यैरात्ता चपला प्रतिसारिणी।
आदाय जीवितं तेषामाहरिष्यामि तामहम्॥ २७॥
अनुवाद
'मैं तुम्हारा वह चिरस्थायी ऐश्वर्य, जो चारों ओर फैला हुआ है, लौटा लाऊँगा, चाहे इसके लिए मुझे उन लोगों के प्राण भी लेने पड़ें जिन्होंने छलपूर्वक उसे छीन लिया है।॥ 27॥
'I shall bring back your everlasting prosperity, which is spread all around, even at the cost of taking the lives of those who have deceitfully snatched it away.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥