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mahabharat 3.5.9: भीमसेन! यदि कोई मुझे (युद्ध या जुए के लिए) बुलाकर कहे कि "आओ", तो मैं पीछे नहीं हट सकता। ऐसी स्थिति में यदि मैं किसी प्रकार जुए में गाण्डीव धनुष हार जाऊँ, तो मेरा राज्य पाना संदिग्ध हो जाएगा।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.5: पाण्डवोंका काम्यकवनमें प्रवेश और विदुरजीका वहाँ जाकर उनसे मिलना और बातचीत करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 5: पाण्डवोंका काम्यकवनमें प्रवेश और विदुरजीका वहाँ जाकर उनसे मिलना और बातचीत करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.5.9 
समाहूत: केनचिदाद्रवेति
नाहं शक्तो भीमसेनापयातुम्।
गाण्डीवे च संशयिते कथं नु
राज्यप्राप्ति: संशयिता भवेन्न:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन! यदि कोई मुझे (युद्ध या जुए के लिए) बुलाकर कहे कि "आओ", तो मैं पीछे नहीं हट सकता। ऐसी स्थिति में यदि मैं किसी प्रकार जुए में गाण्डीव धनुष हार जाऊँ, तो मेरा राज्य पाना संदिग्ध हो जाएगा।॥9॥
 
'Bhimasena! If someone calls me (for war or gambling) saying, "Come", then I cannot back out. In such a situation, if I somehow lose the Gandiva bow in gambling, then my getting the kingdom will be in doubt.'॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)