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mahabharat 3.5.6: वेगवान घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर सवार होकर काम्यक वन में पहुँचकर विदुर जी ने देखा कि धर्मात्मा युधिष्ठिर द्रौपदी, अपने भाइयों तथा ब्राह्मणों के साथ एकान्त स्थान में बैठे हुए हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.5: पाण्डवोंका काम्यकवनमें प्रवेश और विदुरजीका वहाँ जाकर उनसे मिलना और बातचीत करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 5: पाण्डवोंका काम्यकवनमें प्रवेश और विदुरजीका वहाँ जाकर उनसे मिलना और बातचीत करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.5.6 
ततो गत्वा विदुर: काम्यकं त-
च्छीघ्रैरश्वैर्वाहिना स्यन्दनेन।
ददर्शासीनं धर्मात्मानं विविक्ते
सार्धं द्रौपद्या भ्रातृभिर्ब्राह्मणैश्च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वेगवान घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर सवार होकर काम्यक वन में पहुँचकर विदुर जी ने देखा कि धर्मात्मा युधिष्ठिर द्रौपदी, अपने भाइयों तथा ब्राह्मणों के साथ एकान्त स्थान में बैठे हुए हैं।
 
Reaching the Kamyaka forest in a chariot drawn by swift horses, Vidur ji saw the virtuous Yudhishthira sitting in a secluded place with Draupadi, his brothers and the Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)