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mahabharat 3.48.6: जो कर्णी नामक बाणों से प्रहार कर सकते हैं, जो पत्थरों पर रगड़कर तीखे बनाए गए हैं और जिनकी अग्र धार अत्यंत तीक्ष्ण है, उन बाणों से प्रहार करने वाले अर्जुन के सामने कौन टिक सकता है? यहाँ तक कि वृद्धावस्था को जीतने वाली मृत्यु भी उनका सामना नहीं कर सकती।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.48: दु:खित धृतराष्ट्रका संजयके सम्मुख अपने पुत्रोंके लिये चिन्ता करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 48: दु:खित धृतराष्ट्रका संजयके सम्मुख अपने पुत्रोंके लिये चिन्ता करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.48.6 
अस्यत: कर्णिनाराचांस्तीक्ष्णाग्रांश्च शिलाशितान्।
कोऽर्जुनस्याग्रतस्तिष्ठेदपि मृत्युर्जरातिग:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो कर्णी नामक बाणों से प्रहार कर सकते हैं, जो पत्थरों पर रगड़कर तीखे बनाए गए हैं और जिनकी अग्र धार अत्यंत तीक्ष्ण है, उन बाणों से प्रहार करने वाले अर्जुन के सामने कौन टिक सकता है? यहाँ तक कि वृद्धावस्था को जीतने वाली मृत्यु भी उनका सामना नहीं कर सकती।॥6॥
 
Who can stand before Arjuna, who can attack with those arrows called Karni, which have been sharpened by rubbing them on stones and whose front edges are very sharp? Even death, which has conquered old age, cannot face them. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)