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mahabharat 3.48.13: परन्तु अर्जुन को मारने या पराजित करनेवाला कोई नहीं है। मेरे मंदबुद्धि पुत्रों पर उसका बढ़ा हुआ क्रोध कैसे शान्त हो?॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.48: दु:खित धृतराष्ट्रका संजयके सम्मुख अपने पुत्रोंके लिये चिन्ता करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 48: दु:खित धृतराष्ट्रका संजयके सम्मुख अपने पुत्रोंके लिये चिन्ता करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.48.13 
न तु हन्तार्जुनस्यास्ति जेता वास्य न विद्यते।
मन्युस्तस्य कथं शाम्येन्मन्दान् प्रति समुत्थित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु अर्जुन को मारने या पराजित करनेवाला कोई नहीं है। मेरे मंदबुद्धि पुत्रों पर उसका बढ़ा हुआ क्रोध कैसे शान्त हो?॥13॥
 
But there is no one who can kill or defeat Arjuna. How can his increased anger against my dim-witted sons be appeased?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)