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mahabharat 3.46.62: जो मनुष्य प्रतिदिन पाण्डुनन्दन अर्जुन के इस चरित्र को सुनता है, उसके मन में पापमय भोगों की कोई इच्छा नहीं रहती ॥62॥   |   mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.46.62 
इदं य: शृणुयाद् वृत्तं नित्यं पाण्डुसुतस्य वै।
न तस्य काम: कामेषु पापकेषु प्रवर्तते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य प्रतिदिन पाण्डुनन्दन अर्जुन के इस चरित्र को सुनता है, उसके मन में पापमय भोगों की कोई इच्छा नहीं रहती ॥62॥
 
The person who listens to this character of Pandunandan Arjun every day, does not have any desire in his mind for sinful pleasures. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)