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mahabharat 3.46.38: 'कल्याणी! तुम भी मेरे लिए महाभागा कुन्ती और इन्द्राणी शची के समान हो। इस विषय में अन्य कोई विचार नहीं करना चाहिए। 38॥   |   mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.46.38 
यथा कुन्ती महाभागा यथेन्द्राणी शची मम।
तथा त्वमपि कल्याणि नात्र कार्या विचारणा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
'कल्याणी! तुम भी मेरे लिए महाभागा कुन्ती और इन्द्राणी शची के समान हो। इस विषय में अन्य कोई विचार नहीं करना चाहिए। 38॥
 
'Kalyani! You are also like Mahabhaga Kunti and Indrani Sachi for me. There should be no other thought in this matter. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)