Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.46.34: अनघ! शत्रु दमन! तत्पश्चात् चित्रसेन और तुम्हारे पिता की आज्ञा पाकर मैं तुम्हारी सेवा करने के लिए तुम्हारे पास आया हूँ ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.46.34 
ततोऽहं समनुज्ञाता तेन पित्रा च तेऽनघ।
तवान्तिकमनुप्राप्ता शुश्रूषितुमरिंदम॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अनघ! शत्रु दमन! तत्पश्चात् चित्रसेन और तुम्हारे पिता की आज्ञा पाकर मैं तुम्हारी सेवा करने के लिए तुम्हारे पास आया हूँ ॥34॥
 
Anagh! Enemy suppression! Thereafter, following the orders of Chitrasen and your father, I have come to you to serve you. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)