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mahabharat 3.46.32: 'वरवर्णिनी! भगवान इन्द्र ने तुम्हारे लिए एक संदेश लेकर मुझे भेजा है। उसे सुनो और वह कार्य करो जो महेन्द्र को, मुझे और तुम्हें भी प्रिय हो।'॥32॥   |   mahabharat अध्याय 3.46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 46: उर्वशीका कामपीड़ित होकर अर्जुनके पास जाना और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देकर लौट आना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.46.32 
त्वत्कृतेऽहं सुरेशेन प्रेषितो वरवर्णिनि।
प्रियं कुरु महेन्द्रस्य मम चैवात्मनश्च ह॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'वरवर्णिनी! भगवान इन्द्र ने तुम्हारे लिए एक संदेश लेकर मुझे भेजा है। उसे सुनो और वह कार्य करो जो महेन्द्र को, मुझे और तुम्हें भी प्रिय हो।'॥32॥
 
'Varavarnini! Lord Indra has sent me with a message for you. Listen to it and do the work which is dear to Mahendra, me and you too.'॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)