श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.42.9 
तस्मिन् रथे स्थितं सूतं तप्तहेमविभूषितम्।
दृष्ट्वा पार्थो महाबाहुर्देवमेवान्वतर्कयत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु कुन्तीपुत्र ने रथ पर बैठे हुए, चमकते हुए सोने के आभूषणों से सुशोभित सारथि को देखा और उसे देखकर देवता मान लिया॥9॥
 
The mighty-armed son of Kunti looked at the charioteer seated on the chariot who was adorned with ornaments of polished gold. On seeing him he assumed him to be a god.॥9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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