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mahabharat 3.42.7: दस हजार श्वेत और पीले घोड़े, हवा के समान वेग से, उस जादुई दिव्य रथ को खींच रहे थे जो आंखों को चकाचौंध कर देने वाला था।   |   mahabharat अध्याय 3.42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.42.7 
दशवाजिसहस्राणि हरीणां वातरंहसाम्।
वहन्ति यं नेत्रमुषं दिव्यं मायामयं रथम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दस हजार श्वेत और पीले घोड़े, हवा के समान वेग से, उस जादुई दिव्य रथ को खींच रहे थे जो आंखों को चकाचौंध कर देने वाला था।
 
Ten thousand white and yellow horses, as fast as the wind, pulled that magical divine chariot that was dazzling to the eyes. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)