श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  3.42.4-5 
असय: शक्तयो भीमा गदाश्चोग्रप्रदर्शना:।
दिव्यप्रभावा: प्रासाश्च विद्युतश्च महाप्रभा:॥ ४॥
तथैवाशनयश्चैव चक्रयुक्तास्तुलागुडा:।
वायुस्फोटा: सनिर्घाता महामेघस्वनास्तथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस रथ में तलवार, भयंकर शक्ति, अग्निमय गदा, दिव्य प्रभावकारी तलवार, अत्यंत तेजस्वी बिजली, अशनी और चक्र सहित भारी पत्थर के गोले रखे हुए थे, जिन्हें चलाने पर वायु में सनसनाहट उत्पन्न होती थी और जिनसे गड़गड़ाहट और घने बादलों के समान ध्वनि उत्पन्न होती थी ॥4-5॥
 
In that chariot were kept a sword, fierce power, fiery mace, divinely effective sword, extremely radiant lightning, ashani and heavy stone balls with chakra, which when driven would create a sensation in the air. And which produced sounds similar to the sound of thunder and heavy clouds. 4-5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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