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श्लोक 3.42.32  |
ददर्शाद्भुतरूपाणि विमानानि सहस्रश:।
न तत्र सूर्य: सोमो वा द्योतते न च पावक:॥ ३२॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ ऊपर जाकर उसने हजारों अद्भुत विमान देखे । वहाँ न तो सूर्य चमकता है, न चन्द्रमा । यहाँ तक कि अग्नि की चमक भी वहाँ कुछ काम नहीं आती ॥ 32॥ |
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| Going up there, he saw thousands of wonderful aircrafts. Neither the sun nor the moon shines there. Even the glow of fire is of no use there.॥ 32॥ |
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