Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.42.26-27h: 'मैंने यहाँ अनेक स्थानों के सुगन्धित फल खाए हैं। मैंने आपके शरीर से निकले हुए प्रचुर एवं अत्यन्त सुगन्धित जल का पान किया है। मैंने प्रतिदिन आपके झरने का अमृततुल्य सुस्वादु जल पिया है।॥26 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फलानि च सुगन्धीनि भक्षितानि ततस्तत:।
सुसुगन्धाश्च वार्योघास्त्वच्छरीरविनि:सृता:॥ २६॥
अमृतास्वादनीया मे पीता: प्रस्रवणोदका:।
अनुवाद
'मैंने यहाँ अनेक स्थानों के सुगन्धित फल खाए हैं। मैंने आपके शरीर से निकले हुए प्रचुर एवं अत्यन्त सुगन्धित जल का पान किया है। मैंने प्रतिदिन आपके झरने का अमृततुल्य सुस्वादु जल पिया है।॥26 1/2॥
‘I have eaten fragrant fruits from various places here. I have consumed the abundant and extremely fragrant water that has emerged from your body. I have drunk the nectar-like delicious water of your spring every day.॥ 26 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥