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श्लोक 3.42.24  |
अद्रिराज महाशैल मुनिसंश्रय तीर्थवन्।
गच्छाम्यामन्त्रयामि त्वां सुखमस्म्युषितस्त्वयि॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| 'अद्रिराज! हे महान शिला! हे मुनियों के निवास! हे तीर्थों से सुशोभित हिमालय! मैं आपके शिखर पर सुखपूर्वक निवास कर चुका हूँ, अतः आपकी अनुमति लेकर यहाँ से जा रहा हूँ॥ 24॥ |
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| 'Adriraj! O great rock! The abode of sages! The Himalayas adorned with holy places! I have lived happily on your peak, so I am leaving from here after seeking your permission.॥ 24॥ |
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