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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान
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श्लोक 23
श्लोक
3.42.23
त्वत्प्रसादात् सदा शैल ब्राह्मणा: क्षत्रिया विश:।
स्वर्गं प्राप्ताश्चरन्ति स्म देवै: सह गतव्यथा:॥ २३॥
अनुवाद
'गिरिराज! आपकी कृपा से बहुत से ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य स्वर्ग में जाकर देवताओं के साथ बिना किसी कष्ट के रहते हैं।॥ 23॥
'Giriraj! By your grace, many Brahmins, Kshatriyas and Vaishyas go to heaven and live with the gods without any pain.॥ 23॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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