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mahabharat 3.42.2: निद्रा को जीतने वाले बुद्धिमान पार्थ जब इस विषय में विचार कर रहे थे, तभी मातलि सहित एक महारथी वहाँ आ पहुँचा।   |   mahabharat अध्याय 3.42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.42.2 
ततश्चिन्तयमानस्य गुडाकेशस्य धीमत:।
रथो मातलिसंयुक्त आजगाम महाप्रभ:॥ २॥
 
 
अनुवाद
निद्रा को जीतने वाले बुद्धिमान पार्थ जब इस विषय में विचार कर रहे थे, तभी मातलि सहित एक महारथी वहाँ आ पहुँचा।
 
As the wise Partha, who had conquered sleep, thought about this, a mighty chariot with Matali arrived there. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)