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mahabharat 3.40.8: अर्जुन बोले - हे प्रभु! वृषभध्वज! यदि आप प्रसन्नतापूर्वक मेरी इच्छानुसार वर प्रदान करें तो हे प्रभु! मैं उस भयंकर दिव्यास्त्र पाशुपत को प्राप्त करना चाहता हूँ ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.40.8 
अर्जुन उवाच
भगवन् ददासि चेन्मह्यं कामं प्रीत्या वृषध्वज।
कामये दिव्यमस्त्रं तद् घोरं पाशुपतं प्रभो॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - हे प्रभु! वृषभध्वज! यदि आप प्रसन्नतापूर्वक मेरी इच्छानुसार वर प्रदान करें तो हे प्रभु! मैं उस भयंकर दिव्यास्त्र पाशुपत को प्राप्त करना चाहता हूँ ॥8॥
 
Arjun said – Lord! Taurus flag! If you happily grant me the boon as per my wish then Lord! I want to obtain that terrible divine weapon Pashupata. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)