श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 4: विदुरजीका धृतराष्ट्रको हितकी सलाह देना और धृतराष्ट्रका रुष्ट होकर महलमें चला जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.4.15 
ततो राजन् पार्थिवा: सर्व एव
वैश्या इवास्मानुपतिष्ठन्तु सद्य:।
दुर्योधन: शकुनि: सूतपुत्र:
प्रीत्या राजन् पाण्डुपुत्रान् भजन्तु॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यदि ऐसा हो जाए, तो संसार के सभी राजा शीघ्र ही वैश्यों के समान दान लेकर कौरवों की सेवा में उपस्थित हो जाएँगे। हे राजन! दुर्योधन, शकुनि और सारथिपुत्र कर्ण को चाहिए कि वे प्रेमपूर्वक पाण्डवों का स्वागत करें।
 
Maharaj! If this happens, then all the kings of the world will soon present themselves to serve the Kauravas, taking gifts like the Vaishyas. O King of Kings! Duryodhan, Shakuni and charioteer's son Karna should lovingly accept the Pandavas. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)