श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.37.33 
ह्री: श्री: कीर्तिर्द्युति: पुष्टिरुमा लक्ष्मी: सरस्वती।
इमा वै तव पान्थस्य पालयन्तु धनंजय॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! ह्री, श्री, कीर्ति, द्युति, पुष्टि, उमा, लक्ष्मी और सरस्वती ये सभी देवियाँ मार्ग में यात्रा करते समय तुम्हारी रक्षा करें। 33॥
 
Dhananjay! May all these goddesses like Hri, Shri, Kirti, Dyuti, Pushti, Uma, Lakshmi and Saraswati protect you while traveling on the path. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)