Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.35.7: जिसका प्रभाव छिपा हुआ है, वह पृथ्वी पर भार है, क्योंकि वह जनसाधारण में यश प्राप्त नहीं कर सकता। वह बैल के समान कष्ट भोगता रहता है, क्योंकि वह अपनी शत्रुता का बदला नहीं ले सकता। | mahabharat अध्याय 3.35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो न याति प्रसंख्यानमस्पष्टो भूमिवर्धन:।
अयातयित्वा वैराणि सोऽवसीदति गौरिव॥ ७॥
अनुवाद
जिसका प्रभाव छिपा हुआ है, वह पृथ्वी पर भार है, क्योंकि वह जनसाधारण में यश प्राप्त नहीं कर सकता। वह बैल के समान कष्ट भोगता रहता है, क्योंकि वह अपनी शत्रुता का बदला नहीं ले सकता।
One whose influence is hidden is a burden on the earth because he cannot gain fame among the common people. He keeps suffering like a bull because he cannot take revenge for his enmity. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥