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mahabharat 3.33.88: 'भरत! इसी प्रकार संसार में कोई भी घोड़ा, हाथी या कोई भी शूरवीर ऐसा नहीं है, जो युद्धस्थल में क्रोधित होकर विचरण करने वाले मुझ भीमसेन की गदा के बल का सामना कर सके।   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  3.33.88 
न स वीरो न मातङ्गो न च सोऽश्वोऽस्ति भारत।
य: सहेत गदावेगं मम क्रुद्धस्य संयुगे॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
'भरत! इसी प्रकार संसार में कोई भी घोड़ा, हाथी या कोई भी शूरवीर ऐसा नहीं है, जो युद्धस्थल में क्रोधित होकर विचरण करने वाले मुझ भीमसेन की गदा के बल का सामना कर सके।
 
'Bharata! Similarly, there is no horse, elephant or any valiant man in the world who can withstand the force of the mace of me, Bhimasena, who is roaming angrily on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)