Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.33.78: 'राजा युद्ध आदि हिंसा द्वारा पृथ्वी पर अधिकार करते समय जो भी पाप करता है, वे सब राज्य प्राप्त होने पर भारी दक्षिणा सहित यज्ञ करने से नष्ट हो जाते हैं। | mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदेन: कुरुते किंचिद् राजा भूमिमवाप्नुवन्।
सर्वं तन्नुदते पश्चाद् यज्ञैर्विपुलदक्षिणै:॥ ७८॥
अनुवाद
'राजा युद्ध आदि हिंसा द्वारा पृथ्वी पर अधिकार करते समय जो भी पाप करता है, वे सब राज्य प्राप्त होने पर भारी दक्षिणा सहित यज्ञ करने से नष्ट हो जाते हैं।
'Whatever sins the king commits while taking possession of the earth by means of violence caused by war, etc., they are all destroyed by performing yajnas with heavy dakshina after attaining the kingdom.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥