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mahabharat 3.33.61: महाराज! महाबाहो! यह समझकर कि बलवान ही सब पर अधिकार रखते हैं, आपको भी कूटनीति का सहारा लेना चाहिए और अपने शत्रुओं का संहार करना चाहिए॥ 61॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  3.33.61 
एवं बलवत: सर्वमिति बुद्‍ध्वा महीपते।
जहि शत्रून् महाबाहो परां निकृतिमास्थित:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! महाबाहो! यह समझकर कि बलवान ही सब पर अधिकार रखते हैं, आपको भी कूटनीति का सहारा लेना चाहिए और अपने शत्रुओं का संहार करना चाहिए॥ 61॥
 
'Maharaj! Mahabaho! Realising that only the strong have authority over everyone, you should also resort to diplomacy and kill your enemies.॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)