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mahabharat 3.33.59: जैसे शिकारी छोटे-छोटे हिरणों को भोजन का लालच देकर उन्हें छल से पकड़ लेता है, वैसे ही बुद्धिमान राजा शत्रुओं के विरुद्ध कूटनीति का प्रयोग करके उनसे अपना राज्य पुनः प्राप्त कर लेता है॥ 59॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  3.33.59 
जिह्वां दत्त्वा बहूनां हि क्षुद्राणां लुब्धचेतसाम्।
निकृत्या लभते राज्यमाहारमिव शल्यक:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जैसे शिकारी छोटे-छोटे हिरणों को भोजन का लालच देकर उन्हें छल से पकड़ लेता है, वैसे ही बुद्धिमान राजा शत्रुओं के विरुद्ध कूटनीति का प्रयोग करके उनसे अपना राज्य पुनः प्राप्त कर लेता है॥ 59॥
 
‘Just as a hunter tempts small deer with food items and catches them by deceit, similarly a wise king uses diplomacy against his enemies and regains his kingdom from them.॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)