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mahabharat 3.33.49: हे राजन! धन कभी भीख मांगने से, कायरता से या केवल धर्म परायण रहने से प्राप्त नहीं होता ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.33.49 
न चार्थो भैक्ष्यचर्येण नापि क्लैब्येन कर्हिचित्।
वेत्तुं शक्य: सदा राजन् केवलं धर्मबुद्धिना॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! धन कभी भीख मांगने से, कायरता से या केवल धर्म परायण रहने से प्राप्त नहीं होता ॥49॥
 
'O King! Wealth can never be obtained by begging, by being cowardly or by being devoted only to religion. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)