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mahabharat 3.33.4: 'जैसे दुर्बल गीदड़ बचा हुआ अन्न खाकर बड़े बलवान सिंहों का भी भोजन छीन लेते हैं, उसी प्रकार शत्रुओं ने हमारा राज्य हड़प लिया है॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.33.4 
गोमायुनेव सिंहानां दुर्बलेन बलीयसाम्।
आमिषं विघसाशेन तद्वद् राज्यं हि नो हृतम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'जैसे दुर्बल गीदड़ बचा हुआ अन्न खाकर बड़े बलवान सिंहों का भी भोजन छीन लेते हैं, उसी प्रकार शत्रुओं ने हमारा राज्य हड़प लिया है॥4॥
 
'Just as weak jackals, eating leftover food, take away the food of very strong lions, in the same way the enemies have usurped our kingdom.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)