Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.33.22: 'पिताजी! जिस प्रकार मृतक को न तो दुःख होता है और न ही सुख, उसी प्रकार जो मनुष्य सदैव धर्म में तत्पर रहता है और धर्म का पालन करते-करते दुर्बल हो जाता है, वह धर्म और अर्थ दोनों से ही वंचित हो जाता है। | mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'पिताजी! जिस प्रकार मृतक को न तो दुःख होता है और न ही सुख, उसी प्रकार जो मनुष्य सदैव धर्म में तत्पर रहता है और धर्म का पालन करते-करते दुर्बल हो जाता है, वह धर्म और अर्थ दोनों से ही वंचित हो जाता है।
'Father! Just as the dead cannot feel either sorrow or joy, similarly, a person who is always devoted to Dharma and has become weak by performing it, is abandoned by both Dharma and Artha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥