Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.33.15: हे राजन! आप बुद्धिमान, दूरदर्शी और शक्तिशाली हैं। आपने हमारे प्रयासों को देखा है, फिर भी आप यह नहीं समझ रहे हैं कि इस प्रकार दया करने से क्या हानि होगी॥15॥ | mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स भवान् दृष्टिमाञ्छक्त: पश्यन्नस्मासु पौरुषम्।
आनृशंस्यपरो राजन्नानर्थमवबुध्यसे॥ १५॥
अनुवाद
हे राजन! आप बुद्धिमान, दूरदर्शी और शक्तिशाली हैं। आपने हमारे प्रयासों को देखा है, फिर भी आप यह नहीं समझ रहे हैं कि इस प्रकार दया करने से क्या हानि होगी॥15॥
‘O King! You are wise, far-sighted and powerful. You have seen our efforts; yet you are not understanding the harm that will happen by showing mercy like this.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥