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mahabharat 3.33.10: 'हम लोगों ने, जिन्होंने आपके नियम का पालन किया और उस समय धृतराष्ट्र के पुत्रों को नहीं मारा, जो दुष्कर्म किया था, वह आज भी हमें पीड़ा दे रहा है॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.33.10 
यद् वयं न तदैवैतान् धार्तराष्ट्रान्निहन्महि।
भवत: शास्त्रमादाय तन्नस्तपति दुष्कृतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'हम लोगों ने, जिन्होंने आपके नियम का पालन किया और उस समय धृतराष्ट्र के पुत्रों को नहीं मारा, जो दुष्कर्म किया था, वह आज भी हमें पीड़ा दे रहा है॥ 10॥
 
'The misdeed done by us, who obeyed your rule, and did not kill the sons of Dhritarashtra at that time, is tormenting us even today.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)