श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.32.54 
अप्रमत्तेन तत् कार्यमुपदेष्टा पराक्रम:।
भूयिष्ठं कर्मयोगेषु दृष्ट एव पराक्रम:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
सावधान रहो और समय और स्थान के अनुसार अपना कार्य करो। इसमें साहस ही मुख्य मार्गदर्शक है। सभी कार्य-विधियों में साहस को सर्वश्रेष्ठ माना गया है ॥54॥
 
Be cautious and do your work according to the time and place. In this, courage is the main guide. Among all the methods of work, courage is considered the best. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)