Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.32.43: जो लोग अपने कर्मों के फल देने या न देने में संशय रखते हैं, वे अपने लक्ष्य से वंचित रह जाते हैं और जो संशय से मुक्त हैं, वे सफलता प्राप्त करते हैं। ऐसा धीर पुरुष, जो अपने कर्मों में तत्पर और संशय से मुक्त है, देखना सचमुच दुर्लभ है ॥ 43॥ | mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग अपने कर्मों के फल देने या न देने में संशय रखते हैं, वे अपने लक्ष्य से वंचित रह जाते हैं और जो संशय से मुक्त हैं, वे सफलता प्राप्त करते हैं। ऐसा धीर पुरुष, जो अपने कर्मों में तत्पर और संशय से मुक्त है, देखना सचमुच दुर्लभ है ॥ 43॥
People who doubt whether their deeds will bear fruit or not, are deprived of achieving their goals and those who are free from doubts, achieve success. It is indeed rare to see a patient person who is devoted to his deeds and free from doubts. ॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥