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mahabharat 3.32.22: यहाँ मनुष्य जो भी अच्छे या बुरे कर्म करता है, उसे भगवान् द्वारा निर्धारित उसके पूर्वकर्मों का ही फल समझो ॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.32.22 
यद्धॺयं पुरुष: किंचित् कुरुते वै शुभाशुभम्।
तद् धातृविहितं विद्धि पूर्वकर्मफलोदयम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
यहाँ मनुष्य जो भी अच्छे या बुरे कर्म करता है, उसे भगवान् द्वारा निर्धारित उसके पूर्वकर्मों का ही फल समझो ॥ 22॥
 
Whatever good or bad deeds a man performs here, consider them to be the outcome of his previous deeds prescribed by God. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)