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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना
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श्लोक 12
श्लोक
3.32.12
अपि चाप्यफलं कर्म पश्याम: कुर्वतो जनान्।
नान्यथा ह्यपि गच्छन्ति वृत्तिं लोका: कथंचन॥ १२॥
अनुवाद
हम देखते हैं कि लोग व्यर्थ के कार्यों में लगे रहते हैं; यदि वे कोई काम न करें तो वे अपनी जीविका नहीं कमा सकते ॥12॥
We see that people remain engaged in futile activities; if they do not perform any work then they cannot earn their livelihood. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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