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mahabharat 3.32.11: यदि इस पृथ्वी पर सभी लोग अपने-अपने कर्तव्य करना छोड़ दें, तो वे सब नष्ट हो जाएँगे। यदि उनके कर्मों का कोई फल न मिले, तो उनकी कोई वृद्धि नहीं होगी। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.32.11 
उत्सीदेरन् प्रजा: सर्वा न कुर्यु: कर्म चेद् भुवि।
तथा ह्येता न वर्धेरन् कर्म चेदफलं भवेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यदि इस पृथ्वी पर सभी लोग अपने-अपने कर्तव्य करना छोड़ दें, तो वे सब नष्ट हो जाएँगे। यदि उनके कर्मों का कोई फल न मिले, तो उनकी कोई वृद्धि नहीं होगी। ॥11॥
 
If all the people on this earth stop performing their duties, then all of them will be destroyed. If there is no result of their actions, then there will be no growth of these people. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)