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mahabharat 3.315.27: भीमसेन की यह बात सुनकर सभी ब्राह्मणों ने पाण्डवों को आशीर्वाद दिया और भरतवंशियों से अनुमति लेकर अपने-अपने घर चले गये।   |   mahabharat अध्याय 3.315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.315.27 
इत्युक्ते भीमसेनेन ब्राह्मणा: परमाशिषा।
उक्त्वा चापृच्छॺ भरतान्यथास्वान्स्वान्ययुर्गृहान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन की यह बात सुनकर सभी ब्राह्मणों ने पाण्डवों को आशीर्वाद दिया और भरतवंशियों से अनुमति लेकर अपने-अपने घर चले गये।
 
On hearing Bhimasena say this, all the Brahmins gave their best blessings to the Pandavas and after taking permission from the Bharatas, went back to their respective homes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)