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mahabharat 3.315.25: महापराक्रमी नकुल और सहदेव उन समस्त शत्रुओं का नाश करने में समर्थ हैं। मैं ही उन्हें सदैव रोकता आया हूँ॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.315.25 
सहदेवो मया नित्यं नकुलश्च निवारितौ।
शक्तौ विध्वंसने तेषां शत्रूणां भीमविक्रमौ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महापराक्रमी नकुल और सहदेव उन समस्त शत्रुओं का नाश करने में समर्थ हैं। मैं ही उन्हें सदैव रोकता आया हूँ॥ 25॥
 
The fiercely valiant Nakula and Sahadeva are capable of destroying all those enemies. I am the one who has always stopped them.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)