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mahabharat 3.315.18: तात! हे निष्पाप राजा! ब्रह्मर्षि और्वन् (माता) ने उनके गर्भ में गुप्त रूप से निवास करके जो दिव्य कार्य किया था, उसके विषय में तो आपने अवश्य ही सुना होगा ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.315.18 
और्वेण वसता छन्नमूरौ ब्रह्मर्षिणा तदा।
यत् कृतं तात देवेषु कर्म तत्तेऽनघ श्रुतम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तात! हे निष्पाप राजा! ब्रह्मर्षि और्वन् (माता) ने उनके गर्भ में गुप्त रूप से निवास करके जो दिव्य कार्य किया था, उसके विषय में तो आपने अवश्य ही सुना होगा ॥18॥
 
‘Tat! Sinless king! You must have heard about the divine work that Brahmarishi Aurvan (Mother) performed while secretly residing in her womb. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)