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mahabharat 3.313.91: यक्ष ने पूछा - मनुष्यों का सबसे अजेय शत्रु कौन है ? शाश्वत रोग क्या है ? साधु किसे माना जाता है ? और तपस्वी किसे कहते हैं ?॥91॥   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.313.91 
यक्ष उवाच
क: शत्रुर्दुर्जय: पुंसां कश्च व्याधिरनन्तक:।
कीदृशश्च स्मृत: साधुरसाधु: कीदृश: स्मृत:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - मनुष्यों का सबसे अजेय शत्रु कौन है ? शाश्वत रोग क्या है ? साधु किसे माना जाता है ? और तपस्वी किसे कहते हैं ?॥91॥
 
Yaksha asked - Who is the most invincible enemy of humans? What is the eternal disease? Who is considered a saint? And who is called an ascetic?॥91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)