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यक्ष उवाच
तप: किं लक्षणं प्रोक्तं को दमश्च प्रकीर्तित:।
क्षमा च का परा प्रोक्ता का च ह्री: परिकीर्तिता॥ ८७॥
अनुवाद
यक्ष ने पूछा, "तपस्या के लक्षण क्या हैं? आत्म-संयम किसे कहते हैं? परम क्षमा किसे कहते हैं? और लज्जा किसे कहते हैं?"
The Yaksha asked, "What are the characteristics of tapasya? What is called self-control? What is called supreme forgiveness? And what is called shame?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥