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श्लोक  3.313.71 
यक्ष उवाच
किंस्विदात्मा मनुष्यस्य किंस्विद् दैवकृत: सखा।
उपजीवनं किंस्विदस्य किंस्विदस्य परायणम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - मनुष्य की आत्मा क्या है? उसका दिव्य मित्र कौन है? उसके जीवन का आधार क्या है? और उसका परम आश्रय क्या है?
 
Yaksha asked - What is the soul of a human being? Who is its divine friend? What is its support of life? And what is its ultimate refuge?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)