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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.313.50 
युधिष्ठिर उवाच
स्वाध्याय एषां देवत्वं तप एषां सतामिव।
मरणं मानुषो भाव: परिवादोऽसतामिव॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा - वेदों का अध्ययन ब्राह्मणों का धर्म है, तप अच्छे पुरुषों का धर्म है, मरना मानव स्वभाव है और दूसरों की निंदा करना बुरे पुरुषों का आचरण है।
 
Yudhishthira said - Study of the Vedas is the divinity of Brahmins, penance is the religion of good men, dying is the human nature and criticizing others is the conduct of bad men.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)