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mahabharat 3.313.32: मेरे पराक्रमी भाई हिमवान, पारियात्र, विन्ध्य और मलय चार पर्वतों के समान हैं, इन्हें किसने मारा है?॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.313.32 
हिमवान् पारियात्रश्च विन्ध्यो मलय एव च।
चत्वार: पर्वता: केन पातिता भूरितेजस:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मेरे पराक्रमी भाई हिमवान, पारियात्र, विन्ध्य और मलय चार पर्वतों के समान हैं, इन्हें किसने मारा है?॥ 32॥
 
My mighty brothers Himavan, Pariyatra, Vindhya and Malaya are like the four mountains. Who has killed them?॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)