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mahabharat 3.313.30: पिताश्री! जल पीने का साहस मत करो। इस पर मेरा अधिकार है। हे कुन्तीपुत्र! मेरे प्रश्नों का उत्तर दो और फिर जल पीकर ले जाओ। 30।   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.313.30 
मा तात साहसं कार्षीर्मम पूर्वपरिग्रह:।
प्रश्नानुक्त्वा तु कौन्तेय तत: पिब हरस्व च॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! जल पीने का साहस मत करो। इस पर मेरा अधिकार है। हे कुन्तीपुत्र! मेरे प्रश्नों का उत्तर दो और फिर जल पीकर ले जाओ। 30।
 
Father! Do not dare to drink the water. I already have a right over it. O son of Kunti! Answer my questions and then drink the water and take it away. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)