Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.313.120: युधिष्ठिर ने कहा: जब तक किसी व्यक्ति के पुण्य कर्मों की प्रशंसा स्वर्ग और पृथ्वी तक पहुँचती है, तब तक वह मनुष्य कहलाता है।   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  3.313.120 
युधिष्ठिर उवाच
दिवं स्पृशति भूमिं च शब्द: पुण्येन कर्मणा।
यावत् स शब्दो भवति तावत् पुरुष उच्यते॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा: जब तक किसी व्यक्ति के पुण्य कर्मों की प्रशंसा स्वर्ग और पृथ्वी तक पहुँचती है, तब तक वह मनुष्य कहलाता है।
 
Yudhishthira said: As long as the praises of the pious deeds of a person reach heaven and earth, he is called a man. 120.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)