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mahabharat 3.311.20: उनके बैठ जाने पर नकुल बहुत दुःखी और क्रोधित हो गए और अपने बड़े भाई युधिष्ठिर से इस प्रकार बोले:   |   mahabharat अध्याय 3.311: ब्राह्मणकी अरणि एवं मन्थन-काष्ठका पता लगानेके लिये पाण्डवोंका मृगके पीछे दौड़ना और दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 311: ब्राह्मणकी अरणि एवं मन्थन-काष्ठका पता लगानेके लिये पाण्डवोंका मृगके पीछे दौड़ना और दु:खी होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.311.20 
तेषां समुपविष्टानां नकुलो दु:खितस्तदा।
अब्रवीद् भ्रातरं श्रेष्ठममर्षात् कुरुनन्दनम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उनके बैठ जाने पर नकुल बहुत दुःखी और क्रोधित हो गए और अपने बड़े भाई युधिष्ठिर से इस प्रकार बोले:
 
After they sat down, Nakula became very sad and angry and spoke to his elder brother Yudhishthira in the following manner:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)