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mahabharat 3.311.15: ब्राह्मण की बात सुनकर कुंतीपुत्र युधिष्ठिर बहुत दुःखी हुए और अपने भाइयों के साथ धनुष लेकर मृग की खोज में दौड़ पड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.311: ब्राह्मणकी अरणि एवं मन्थन-काष्ठका पता लगानेके लिये पाण्डवोंका मृगके पीछे दौड़ना और दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 311: ब्राह्मणकी अरणि एवं मन्थन-काष्ठका पता लगानेके लिये पाण्डवोंका मृगके पीछे दौड़ना और दु:खी होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.311.15 
ब्राह्मणस्य वच: श्रुत्वा संतप्तोऽथ युधिष्ठिर:।
धनुरादाय कौन्तेय: प्राद्रवद् भ्रातृभि: सह॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण की बात सुनकर कुंतीपुत्र युधिष्ठिर बहुत दुःखी हुए और अपने भाइयों के साथ धनुष लेकर मृग की खोज में दौड़ पड़े।
 
On hearing the Brahmin's words, Kunti's son Yudhishthira became very sad. He, along with his brothers, took up his bow and ran in search of the deer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)