श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.309.13 
वसुवर्मधरं दृष्ट्वा तं बालं हेमकुण्डलम्।
नामास्य वसुषेणेति ततश्चक्रुर्द्विजातय:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस बालक को वसु (स्वर्ण) कवच और सोने के कुण्डल पहने देखकर ब्राह्मणों ने उसका नाम 'वसुषेण' रखा ॥13॥
 
Thereafter, seeing the child wearing Vasu (golden) armor and gold earrings, the Brahmins named him 'Vasushen'. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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