Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.307.28: तत्पश्चात् सूर्यदेव ने अपने तेज से उसे मोहित कर लिया और योगबल से उसमें प्रवेश करके अपना तेजोमय वीर्य उसके भीतर डाल दिया। उन्होंने कुन्तिका को कलंकित नहीं किया - उसका कौमार्य अक्षुण्ण रहा। तत्पश्चात् राजकुमारी पुनः सचेत हो गई। 28॥ | mahabharat अध्याय 3.307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् सूर्यदेव ने अपने तेज से उसे मोहित कर लिया और योगबल से उसमें प्रवेश करके अपना तेजोमय वीर्य उसके भीतर डाल दिया। उन्होंने कुन्तिका को कलंकित नहीं किया - उसका कौमार्य अक्षुण्ण रहा। तत्पश्चात् राजकुमारी पुनः सचेत हो गई। 28॥
Thereafter, the Sun God captivated her with his brilliance and by the power of Yoga, he entered her and deposited his luminous semen inside her. He did not taint Kuntika – her virginity remained untouched. After that the princess became conscious again. 28॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि कुण्डलाहरणपर्वणि सूर्यकुन्तीसमागमे सप्ताधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३०७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत कुण्डलाहरणपर्वमें सूर्यकुन्ती-समागमविषयक तीन सौ सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥